आयुर्वेदिक हर्बल पेय
आयुर्वेदिक हर्बल पेय
*आयुर्वेदिक हर्बल पेय जो सभी प्रकार के नये एवं पुराने मियादी बुखार , भूख की कमी , सिरदर्द , श्वास पथ में संक्रमण , दुर्बलता , कफ , खाँसी में पूर्णतः लाभदायक है । यह व्यक्ति की रोग - प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर जीवाणु एवं विषाणु जन्य संक्रमण से शरीर की रक्षा करता है । इसे हम नित्य चाय - कॉफी अथवा अन्य पेय पदार्थों मे मिलाकर भी उपयोग में ले सकते है*
*तैयार करने की विधि - 500ml उबलते हुए पानी में लगभग आधा छोटा चम्मच चूर्ण को डाले तत्पश्चात् 10 मिनट ढक्कन से ढ़ाक दे व छानकर गर्म - गर्म ही सेवन करें*
*चूर्ण तैयार करने के लिए घटक द्रव्य ( 100ग्राम चूर्ण के अनुसार ) सौंठ ,काली मिर्च, पीपली 15 15 ग्राम (यह त्रिकुटा के रूप में भी मिलता है) लौंग , छौटी ईलायची, बड़ी ईलायची , दालचीनी,अजवायन जायफल ,जावित्री ,सूखे तुलसी पत्ते,हल्दी , मुलेठी, स्टीविया पत्ती लगभग 6 6 ग्राम मिलाकर बारीक चूर्ण बनाकर रखें*
*(सभी औषधि उपलब्ध न होने पर जो जो उपलब्ध हो उसी को मिलाकर उपयोग करें अर्थात प्राकृतिक औषधियों का सेवन करना जरूरी है)*
*वायरल संक्रमण के समय इस काढ़े को प्रतिदिन 100 मि . ली . की मात्रा में कम से कम 3 दिन तक सेवन करें*
*इस चूर्ण का स्वास्थ्य पर कोई विपरीत प्रभाव नही होता है*
*यह एंटी वायरल आयुर्वेदिक औषधि जन - सेवा हेतु तैयार कर निःशुल्क वितरित की जा सकती है*
*अतः आप सभी से निवेदन है इसे यथसम्भव अपने सगे सम्बन्धियो को जरूर प्रेरित करें इस पेय को ग्रहण करने हेतु*
*बदलते मौसम के समय इसे 10 15 दिन पहले से सेवन कर मौसम के बदलाव से होने वाले दुष्प्रभाव से अपने परिवार को बचा सकते हैं*
*निरोगी रहने हेतु महामन्त्र*
*मन्त्र 1 :-*
*• भोजन व पानी के सेवन प्राकृतिक नियमानुसार करें*
*• रिफाइन्ड नमक,रिफाइन्ड तेल,रिफाइन्ड शक्कर (चीनी) व रिफाइन्ड आटा ( मैदा ) का सेवन न करें*
*• विकारों को पनपने न दें (काम,क्रोध, लोभ,मोह,इर्ष्या,)*
*• वेगो को न रोकें ( मल,मुत्र,प्यास,जंभाई, हंसी,अश्रु,वीर्य,अपानवायु, भूख,छींक,डकार,वमन,नींद,)*
*• एल्मुनियम बर्तन का उपयोग न करें ( मिट्टी के सर्वोत्तम)*
*• मोटे अनाज व छिलके वाली दालों का अत्यद्धिक सेवन करें*
*• भगवान में श्रद्धा व विश्वास रखें*
*मन्त्र 2 :-*
*• पथ्य भोजन ही करें ( जंक फूड न खाएं)*
*• भोजन को पचने दें ( भोजन करते समय पानी न पीयें एक या दो घुट भोजन के बाद जरूर पिये व डेढ़ घण्टे बाद पानी जरूर पिये)*
*• सुबह उठेते ही 2 से 3 गिलास गुनगुने पानी का सेवन कर शौच क्रिया को जाये*
*• ठंडा पानी बर्फ के पानी का सेवन न करें*
*• पानी हमेशा बैठ कर घुट घुट कर पिये*
*• बार बार भोजन न करें आर्थत एक भोजन पूर्णतः पचने के बाद ही दूसरा भोजन करें*
*उस भोजन को ग्रहण कदापि न करें जिसे बनते हुए सूर्य प्रकाश न मिला हो अर्थात (कुकर का, फ्रीज़ का रखा व माइक्रोवेव का बना हो)
विशेष >
1
आप को दी गई जानकारी सही है
2
आप अपने शरीर के हिसाब से खुराख ले
3
अन्य किसी की सहला भी ले सकते है
4
अपने विवेक से उपचार करे
5आप उपचार करने से पहले अपने परिचित व अनुभवी वैध से सलाह अवश्य ले

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